नीम्बूवर्गीय फल पौधों में अनियमित तथा दोषपूर्ण काट-छांट के कारण होने वाले नुकसान

जल प्ररोह (Water Shoots), निम्बू वर्गीय फलों में जल प्ररोह के कारण रोगी शाखायें शीर्ष से लेकर नीचे की ओर सूखने लगती है , पत्तियां समय से पहले पीली,
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 समय पर हटायें जल प्ररोह (वाटर सूट्स )।

जल प्ररोह (Water Shoots) -  नीम्बूवर्गीय फल पौधों में अनियमित तथा दोषपूर्ण काट-छांट के कारण एकाएक पौधों में वाटर स्प्राउट्स निकल आते हैं। ये कोमल, हरे तथा अति शीघ्र बढ़ने वाले होते हैं इनमें पत्तियों बड़ी, खुरदरी, तना चपटा व कटीला होता है। 

वाटर स्प्राउट्स के रहने देने से पेड़ का आकार खराब हो जाता है और पेड़ के बाकी हिस्सों से पोषक तत्वों की व ऊर्जा की कमी हो जाती है, बीमारियों और कीटों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं,

ऐसे प्ररोहों में फल फूल कम व छोटे  आते हैं। पेड़ की नियमित रूप से जाँच करें और जैसे ही वाटर स्प्राउट्स की नई कोंपलें निकलें उन्हें शीघ्र हटालें। डाइवैक की शुरुआत इन्ही वाटर स्प्राउट्स से शुरू होती है।

नीम्बूवर्गीय फल पौधौं का उम्र पूरी होने से पहले 10-15 बर्षों बाद ही कमजोर हो कर सूखने को सिट्रस डिक्लाइन (citrus decline) या डाइवैक  (die back) कहते हैं। इस रोग में रोगी शाखायें शीर्ष से लेकर नीचे की ओर सूखने लगती है , पत्तियां समय से पहले पीली होकर गिरने लगती है, फूल अधिक आते हैं किन्तु फल कम लगते हैं, फलों का उत्पादन कम हो जाता है साथ ही फल छोटे व फलों की गुणवत्ता कम होने लगती है, फलों का छिलका मोटा हो जाता है,पौधों के तने व शाखाओं से गोंद आने लगता है तथा पौधे कमजोर हो कर सूखने लगते हैं।

 डायवैक रोग के कई कारण हो सकते है जिनमें, गलत कांट छांट ,अम्लीय मृदा,पानी निकासी का उचित प्रबंध न होना, पोषण की कमी, कीट व्याधि का प्रकोप आदि प्रमुख हैं। इन सबमें सबसे बड़ा कारण है वाटर सूट्स को बढ़ने देना।

लेख- डा० राजेंद्र कुकसाल।


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