आम का चुर्णिल आसिता (पाउड्री मेल्ड्यू) रोग का उपचार कैसे करें

आम का चुर्णिल आसिता (पाउड्री मेल्ड्यू) रोग का उपचार कैसे करें,
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 आम का चुर्णिल आसिता (पाउड्री मेल्ड्यू) रोग,कैसे करें उपचार।


 आम का चुर्णिल आसिता (पाउड्री मेल्ड्यू ) रोग  कभी कभी पूरी फसल को नष्ट कर देता है। आम के बाग में सबसे अधिक ध्यान बौर आते समय रखना चाहिए इन्ही एक दो माह (जनवरी फरवरी)में आम के बाग की देख भाल कर अच्छी उपज ली जा सकती है। 

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आम में चुर्णिल आसिता रोग का प्रकोप बौर आते समय उष्ण नम वातावरण और ठंडी रातों में अधिक होता है। दिन के समय 10 से 30 डिग्री सेल्सियस के गर्म तापमान और रात के कम तापमान के साथ वातावरण में 60-90% की आद्रर्ता इस रोग के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। अनुकूल परिस्थितियां में पत्तियों या कलियों के नीचे उपस्थित रोग जनकों से बीजाणु निकलकर हवा या बारिश से पौधे की मंजरियों व अन्य पेड़ों तक पहुंचते हैं। मंजरियां और नई पत्तियां पर सफेद या धूसर चूर्णिल की वृद्धि दिखलाई पढती है। रोग का संक्रमण मंजरियां की शिखा से प्रारम्भ होकर नीचे की ओर पुष्प अक्ष,नई पत्तियां और पतली शाखाओं पर फैल जाता है इससे प्रभावित भागों की वृद्धि रुक जाती है पुष्प व पत्तियां गिरने लगते हैं यदि संक्रमण से पूर्व फल लगगये हों तो वे भी अपरिपक्व अवस्था में गिरने लगते हैं। 

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प्रारंभिक अवस्था में रोग ग्रस्त पुष्प क्रमो/पुंजों की छंटाई और हवा दार स्थान और पेड़ की छतरी में सूरज की रोशनी के प्रवेश जैसी व्यवस्थाएं बनाने से रोगजनक इनोकुलम को कम किया जा सकता है। रोग से बचाव हेतु बौर आते समय पौधों पर नीम आयल एक चम्मच दवा दो लीटर पानी में घोल बनाकर या एक गिलास पुराना सढा मट्ठा/ छांच में छ गिलास पानी मिलाकर लगातार एक हफ्ते के अन्तराल में पौधों पर छिड़काव करने से रोग से बचा जा सकता है।

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रोग के फैलने पर रासायनिक उपचार द्वारा ही रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। रोग की रोक थाम हेतु कार्बनडाजिम 0.1% (एक ग्राम दवा एक लिटर पानी में )या घुलनशील गंधक (सलफेक्स) 0.2%(दो ग्राम दवा एक लिटर पानी में )दवाइयों का घोल बनाकर पहला छिड़काव बौर आने से पहले जनवरी,दूसरा फरवरी के आरम्भ में और तीसरा छिड़काव फरवरी के अंत में करना चाहिए।इन महीनों में जब आसमान में बादल हों उससमय उपरोक्त दवाओं का छिड़काव और भी अनिवार्य हो जाता है अन्यथा आम की फसल को भारी नुक्सान होता है।

 कभी कभी खस्ता फफूंदी और हापर कीट दोनों एक साथ पाए जाते हैं एक छिड़काव कीट नाशी दवा इमिडाक्लोप्रिड 0.1% का घोल बनाकर छिड़काव करें।

लेखक - डा० राजेंद्र कुकसाल।

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