अमरबेल से फसलों एवं बृक्षों का कैसे करें बचाव

अमरबेल या आकाश बेल (cuscuta),अमरबेल से कैसे करें फसलों एवं बृक्षों का बचाव,
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  विनाशकारी, अमरबेल से  कैसे करें फसलों एवं बृक्षों का बचाव।


अमरबेल या आकाश बेल (cuscuta) सबसे अधिक आर्थिक रूप से हानिकारक परजीवी खरपतवारों में से एक है, जो अपना भोजन बनाने और अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए दूसरी फसलों/ पौधों / बृक्षों पर निर्भर रहते हैं।

इस विनाशकारी खरपतवार को अलसी, चुकंदर, मिर्च, सोयाबीन, प्याज, अरहर, तिल, सूरजमुखी की फसलों, बबूल, कीकर, बेर, आदि की झाड़ियों, शोभाकार पौधों, नीम्बूवर्गीय फलों  अन्य फलदार पौधों,बांज के जंगल आदि पर  देखा जा सकता है।

इसकी बेल पोषक पौधौं पर पीले जाल के रूप में लिपटी रहती है। जिसमें पत्तियों और क्लोरोफिल का पूर्णत: अभाव होता है। इसीलिए इसका रंग पीत -मिश्रित सुनहरा या हल्का लाल होता है। इसका तना लंबा, पतला, शाखायुक्त और चिकना होता है। तने से अनेक मजबूत पतली-पतली और मांसल शाखाएँ निकलती हैं जो आश्रयी पौधे (होस्ट) को अपने भार से झुका देती हैं।

अमर बेल का प्रसारण बीज तथा बानस्पतिक प्रवर्धन दोनों से  होता है अमरबेल परजीवी पौधे में उगने के 25-30 दिन बाद सफेद अथवा हल्के पीले रंग के पुष्प गुच्छे में निकलते हैं। प्रत्येक पुष्प गुच्छ में 15-20 फल तथा प्रत्येक फल में 2-3 बीज बनते है। अमरबेल के बीज अत्यंत छोटे होते है  बीजों का रंग भूरा अथवा हल्का पीला एवं बरसीम के बीजों के जैसा होता है। पकने के बाद बीज मिट्टी में गिरकर काफी सालों तक सुरक्षित पड़े रह सकते है तथा उचित वातावरण एवं नमी मिलने पर  अंकुरित होकर होस्ट को नुकसान पहुँचाते है।

अमरबेल कभी एक साथ नही फैलती हैं, अत: खेत /पौधों /बृक्षों का लगातार निरीक्षण करना आवश्यक है। शुरू में 2-3 स्थानों पर व बाद में पूरे खेत/ पौध /बृक्ष में फैल जाती हैं।

अमरबेल का बीज जमीन पर पुष्पीय परजीवी पौधे की भाँति उगते हैं तथा बाद में लताओं की तरह बडकर पेड़ों के ऊपर छा जाते हैं। पेड़ों पर छाने के पष्चात लताओं से चूषक निकल कर टहनियों की छाल में प्रवेष कर जाते हैं  परजीवी पौधे चूषकांगों के द्वारा मेजबान पेड़ों से पानी तथा पोषकीय तत्व शोषित करते हैं जिसके कारण पेड  कमजोर होकर सूखने लगते हैं।

अमरबेल से बचाव-

पौधों पर अमरबेल को देखते ही शुरुआत में ही प्रभावित भाग को काट कर निकाल कर नष्ट करदेना चाहिए  इससे इस बेल को बढ़ने से रोका जा सकता है। जहां भी लगे कि अमरबेल पनप रही है तो इसे तुरंत  वहां से निकालकर जलाकर नष्ट करें, हटा कर इधर उधर न फेंकें, कहीं और फेंकने से वहां भी वह पनप सकती है।पेड़-पौधों से हटाने के बाद यह दोबारा पनप जाए, तो आपको बार-बार यही करना होगा, क्योंकि इसे पूरी तरह से नष्ट नहीं किया जा सकता है किन्तु फैलने से अन्य पौधों को बचाया जा सकता है।

आसपास कहीं भी पौधों या बृक्षों पर अमर बेल दिखाई देने पर शुरू में ही पौधे के उस भाग को काट कर जला कर नष्ट करें, यह कार्य हर जागरूक नागरिक को करने होंगे तभी इसे फैलने से रोका जा सकता है।

प्रभावित होने वाली फसलों के बचाव हेतु फसल चक्र अपनायें  घास कुल की फसलें जैसे गेहूँ, धान, मक्का, ज्चार, बाजरा आदि में अमरबेल का प्रकोप नहीं होता है। अतः प्रभावित क्षेत्रों में फसल चक्र में इन फसलों को लेने से अमरबेल का बीज अंकुरित तो होगा परन्तु एक सप्ताह के अंदर ही सुखकर मर जाता है फलस्वरूप जमीन में अमरबेल के बीजों की संख्या में काफी कमी आ जाती है। 

रासायनिक खरपतवार नाशक दवाओं जैसे पैन्डीमेथालिन,पैराक्वाट   या ग्लाइफोसेट का उपयोग अंकुरित बीज एवं पौधों पर लगी बेलों को नष्ट करने हेतु  किया जा सकता है।

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