फूलगोभी में भूरापन ओर बोरोन (B ) कमी के लक्षण एवं उपचार।

फूलगोभी में भूरापन ओर बोरोन (B ) कमी के लक्षण एवं उपचार,पौधों में बाँझपन ओर बौनापन कैसे आता है ओर उपचार विधि,
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 फूलगोभी में भूरापन।

फूलगोभी में भूरापन ओर बोरोन (B ) कमी के लक्षण एवं उपचार।




 फूल गोभी में फूल बनने पर प्रारंम्भिक अवस्था में फूल पर पानी से भीगे जैसे दाग अक्सर भूरापन/ हल्का गुलाबी रंग लिये दिखाई देने लगते है साथ ही सतह पर भूरे या गुलाबी रंग के क्षेत्र बन जाते हैं जिसे भूरा सड़न या लाल सड़न भी कहते हैं। 

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     प्रभावित फूल स्वाद में कड़वे हो जाते हैं। पौधों का तना खोखला हो जाता है साथ ही पत्तियां का रंग पहले हरे रंग में और फिर पुराने पत्तों के शीर्ष पर हरा पीलापन लिए हो जाता है। यह समस्या गोभी में बोरोन सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी के कारण आती है।

   ठीक से  पहचान न होने के कारण कई बार किसान पोषक तत्वों की कमी को कीट, रोग (फफूंद, बैक्टीरिया एवं बीषाणु)  समझ कर  कई प्रकार की रसायनिक दवाओं का छिडकाव कर रोकथाम करने का प्रयास करते है, जिससे उनका श्रम, पैसा व समय बर्बाद होता है एवं सफलता भी नही मिलती। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अम्लीय मृदा के कारण बोरोन की कमी अधिक देखने को मिलती है।


बोरोन (B ) कमी के लक्षण एवं उपचार-


फसलों की बढ़वार एवं अच्छी उपज के लिए नत्रजन, फोसफोरस एवं पोटाश के अतिरिक्त सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे- जस्ता, ताम्बा, लोहा, मैंगनीज, बौरोन, मोलिब्डेनम एवं क्लोरीन की आवश्यकता होती है। 


 अधिक उपज देने वाली फसलों की प्रजातियों का फसल में समावेश, गहन खेती, रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग एवं  जैविक खादों (गोबर की खाद कम्पोस्ट केंचुए की खाद हरी खाद आदि का खेत में कम मात्रा में डालने के कारण भूमि में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसकारण  फसलों में कई विकृतियों / रोग होने से अच्छी उपज  प्राप्त नहीं होती है। 


पौधों में जरूर पोषक तत्वों जिसमें बोरोन एक मुख्य सूक्ष्म पोषक तत्व है जिसकी कमी से पौधों में कई प्रकार की विकृतियों देखने को मिलती है। सामान्यतः बोरोन की कमी लाल एवं धूसर / कम उर्वरा शक्ति वाली मृदाओं , अम्लीय मृदाओं , कम कार्बनिक पदार्थ वाली मृदाओं  एवं चुनेदार मृदाओं में अधिक रूप में पाई गई है। क्षारीय / लवणीय मृदाओं में भी बोरोन की कमी पाई जाती है।

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बोरान का महत्व -


बोरान फलों को फटने से बचाता है। बोरान पौधों की कोशिकाओं में घुलनशील रूप में होता है तथा उसकी झिल्ली को मजबूत व लचीला बनाता है।


यह पौधों में जल शोषण की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।


यह परागण एवं प्रजनन क्रियाओं में सहायक है।


बोरान पौधों में कैल्शियम एवं पोटैशियम के अनुपात को नियंत्रित करने में सहायक है।


 दलहनी फसलों की जड़ों में गांठें अधिक बनाता है इससे नत्रजन पोषक तत्व का स्थिरीकरण अधिक होता है।


बोरोन कमी के लक्षण -


 पौधों में बोरोन की कमी के लक्षण सर्व प्रथम पौधों के ऊपर के भागों दिखाई देता है, क्योंकि पौधों के भीतर इसकी भ्रमणशीलता बहुत ही कम है। 


बोरोन की कमी होने पर पौधों की अग्रिम कलिका की मृत्यु हो जाती है जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है शाखाएँ बहुत कम निकलती हैं ।


पौधे की ऊपरी बढ़वार का रुकना तथा तने की गांठों के बीच की लम्बाई का कम होना।


पौधों में बौनापन होना एवं जड़ों का विकास रुकना।


 फूलों में बांझपन आ जाता है जिससे पौधे में दानें नहीं बनते हैं।


 बोरोन की कमी से जड़ वाली फसलों में हार्टरोट, फूलगोभी में ब्राउनिंग या खोखला तना एवं तम्बाखू में टापसिकनेस नामक बीमारी का लगना।


 पौधों के तनों में खालीपन एवं फलों के आकार में विकृति आन्तरिक ऊतकों का ह्यस आदि लक्षण दिखाई देते हैं।


फूलों में निषेचन की क्रिया बाधित हो जाती है क्योंकि परागण व परागनली के लिए बोरान आवश्यक तत्व है।


अधपके फल व फलियां गिरने लगती हैं।

पौधे के तने और पत्तियों के डंठल पर दरारें पड़ जाती है। कभी-कभी पत्तियों की शिराओं पर भी देखी जा सकती है। तना व पत्तियां मोटी होकर टूटने लगती हैं।


नई कलियां बनना बंद हो जाती हैं, वृद्धि वाला भाग मुरझाने लगता है तथा डायबेक के कारण सूख जाता है।


फलों में विशेष रूप से सेव में फल में अंतर या बाह्या कॉर्क या सूखे दाग होना, फल काटने पर भूरे रंग के दाग,

फल छोटे, सख्त व रस की कमी हो जाती है|


फलों का फट जाना-

फलों के आकार लेने पर बाहर की त्वचा में पारगम्यता Permiability व लचीलापन जरूरी है। जिससे फल ठीक तरह से विकसित होता है। लेकिन बोरोन की कमी से त्वचा में कठोरता आ जाती है, जिससे फल फट जाते हैं।

प्रबन्धन एवं उपचार -

भूमि का मृदा परीक्षण अवश्य कराएं जिससे मृदा में कार्वन की मात्रा , पी.एच.मान तथा चयनित भूमि में उपलव्ध पोषक तत्वों की जानकारी मिल सके।


भूमि का पी एच मान लगभग 6.5 होना चाहिए। यदि मिट्टी का पी.एच. मान कम (अम्लीय) है तो मिट्टी में चूना या लकड़ी की राख मिलायें यदि मिट्टी का पी.एच. मान अधिक (क्षारीय) है तो मिट्टी में कैल्सियम सल्फेट,(जिप्सम) मिलायें।


विभिन्न फसलों में बोरोन की कमी को दूर करने के लिए 1.5 से 2.0 किग्रा. बोरोन प्रति हैक्टर (15-20 कि.ग्रा. बोरैक्स/हैक्टर) की दर से बुआई से पूर्व भूमि में मिलाना चाहिए।


बोरोन उर्वरकों का बुआई से पूर्व मृदा में प्रयोग पौधों की पत्तियां पर छिड़काव की अपेक्षा अधिक प्रभावी होता है। खड़ी फसल में कमी दिखाई देने पर बोरिक एसिड का 0.2 प्रतिशत घोल का पुष्पन के समय पर्णीय छिड़काव किया जा सकता है।


खेत की तैयारी के समय भूमि में सडी गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद या केंचुए की खाद आदि जैविक खादें प्रचुर मात्रा में डालें। जीवामृत का प्रयोग करें।


अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें- डा० राजेंद्र कुकसाल।

मो० 9456590999

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