हरसिल क्षेत्र में फिर लौट सकता है सेब का स्कैब

सेब में स्कैब रोग किस कारण होता है , सेब में धब्बे बनने कारण व इसका उपचार कैसे करें,
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उत्तरकाशी जनपद के हरसिल  क्षेत्र में फिर लौट सकता है सेब का स्कैब !



 उतकाशी जनपद के हरसिल  क्षेत्र के  मुखवा गांव में   कुछ बागवानों के बागों में स्कैब रोग के लक्षण पौधो व फलों में दिखाई दे रहे हैं इस सम्बंध में सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्राम प्रधान भंगेली, भटवाड़ी उत्तरकाशी,श्री प्रवीन प्रज्ञान तथा कृषक, बागवान एवं उद्यमी संगठन के संयोजक एवं महामंत्री श्री दीपक करगेती द्वारा  उत्तरकाशी जनपद में सेब स्कैब रोग की फोटो साझा की गई है।

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बर्ष 1982-83 में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में सेब स्कैव महामारी के रूप में फैला था जिस कारण राज्य के सेब उत्पादकों एवं पौधशाला स्वामियों को बहुत नुक्सान उठाना पड़ा था। 


सेब में स्कैब रोग वेंचूरिया इनैक्वैलिस नामक फंफूद से उत्पन्न होता है। हवा में उपस्थित इस रोग के बीजाणु ( स्पोर) उचित तापमान व नमी में पहले सेब की पत्तियों पर आक्रमण करते  है। मार्च-अप्रैल में संक्रमित पत्तियों की निचली सतह पर हल्के जैतूनी हरे रंग के धब्बे पड़ जाते हैं जो बाद में भूरे तथा काले हो जाते हैं, बाद में पत्तों की ऊपरी सतह पर भी ये धब्बे बन जाते हैं जो अक्सर मखमली भूरे से काले रंग वाले तथा गोलाकार होते है। कभी-कभी संक्रमित पत्ते मखमली काले रंग से ढक जाते हैं जिसे शीट स्कैब कहते हैं। रोगग्रस्त पत्तियां समय से पूर्व (गर्मियों के मध्य में ही) पीली पड़ जाती है। इस रोग के धब्बे फलों पर भी प्रकट होते हैं। बसंत ऋतु के आरंभ में ये धब्बे फलों के निचले सिरे पर पाए जाते है जो भूरे से काले रंग के होते हैं। अधिक संक्रमण होने पर फल विकृत हो जाते हैं और उनमें दरारें पड़ जाती है।  

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रोग के कारण उपज कम होती है,फलों का आकार छोटा व विकृत होने तथा फलों पर दाग पड़े होने के कारण बागवान को बाजार में कम मूल्य मिलता है ।

रोग फैलने के कारण-

विना क्वरैनटाइन किये काश्मीर हिमाचल व अन्य वाहरी राज्यों से आपूर्ति किए गए फल पौध, पौधों की उचित देखभाल न करना,स्प्रे शैड्यूल का पालन न करना, जलवायु परिवर्तन आदि इस रोग के फैलने के कारण हो सकते हैं।


यदि उद्यान विभाग द्वारा समय रहते स्कैब रोग से ग्रसित बागों को अभी से आइसोलेट न किया गया तथा इन बगीचौं के इनोकुलम ( संक्रमण के लिए जिम्मेदार रोगजनक के भागों यथा पत्तियों फल टहनियां आदि) को कम या नष्ट नहीं किया गया तो आगामी वर्षो में स्कैब राज्य में महामारी का रूप ले सकता है तथा सेब उत्पादकों को बहुत बड़ा नुक्सान उठाना पड़ सकता है।


बागवानों को सलाह-

फसल तुड़ाई के बाद जमीन पर गिरी पत्तियां फल व टहनियों को इकट्ठा कर नष्ट करें साथ ही सेब के पौधों एवं जमीन पर गिरी पत्तियों व पौधों के अवशेषों पर फफूंद नाशक दवा कापर आक्सीक्लोराइड का 300 ग्राम दबा 100 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर इनवोकुलम कम करने का प्रयास करें  जिससे आगामी वर्षों में स्कैब रोग की रोकथाम की जा सके। सेब के स्प्रे शैड्यूल का सख्ती से पालन करें।


अधिक जानकारी के के लिए  सम्पर्क करें- डा० राजेन्द्र कुकसाल।

मो० 9456590999

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