Guava Orchard High Density Technique अमरुद का बाग- उच्च घनत्व तकनीक

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वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए जिसमें स्वरोजगार कृषि बागवानी व पशुपालन के क्षेत्र में महत्व देखकर अपनाया जा रहा है इसका कारण दैनिक उपभोग की आवश्यकताओं व फलों की मांग अधिक होने के कारण युवा पीढ़ी इस ओर ध्यान दे रही है पर्वतीय अंचलों में पूर्व से  उद्यान की  अवधारणा सीमित क्षेत्रों तक ही रही है।जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को एकीकृत खेती के माध्यम से कम किया जा सकता है जिसके अलग अलग मॉडल उपलब्ध भूमि के क्षेत्रफल के अनुसार तय किया जा सकता है।



अमरूद की फसल में सुखा सहन करने की क्षमता व कम समय मे फल देने वाली फसल  है पूर्व समय से अमरूद बाग पारम्परिक रूप से स्थापित किये गए है नई तकनीकी उच्च घनत्व प्रणाली से बाग स्थापित करने से उत्पादन के स्तर को बढ़ाया जा सकता है। इसके बाग स्थापित करने के लिए-


 भूमि का चयन- बलुई दोमट उचित जल निकास वाली ।

गढ्ढा रेखांकन व खुदाई-  रेखाकन कार्य मार्च अप्रेल में व गढ्ढा खुदाई जून माह में करनी चाहिए  पर्वतीय क्षेत्रों में गढ्ढा खुदान करते समय गढ्ढे से निकली मिट्टी को ढाल की तरफ निकाल के रखना चहिय व गढ्ढे से मिट्टी निकलते समय गढ्ढे की आधा मिट्टी एक तरफ व आधा मिट्टी एक तरफ रखनी चाहिए। गढ्ढे को 2×2×2 फीट का बनाना चाहिए।

गढ्ढा भरान- जून के आखिर में गढ्ढा भरना चाहिए। गढ्डा खुदान के समय जो ऊपरी मिट्टी थी उसमें ट्राइकोडर्मा ओर सयोडोमोनास से उपचारित गोबर की खाद या कम्पोस्ट की खाद को खेत मे ढांग लगाकर ढक देना चाहिए जिसे मिट्टी में मिलाते 1 किलोग्राम चूना व 300 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट  एक बार अच्छे से मिला देना चाहिए ओर फिर गढ्डा भरना चाहिए।

पौध-  2.5 एकड़ या 1 हेक्टयर या  50 नाली में 5000पौध लगती है।

पौध से पौध की दूरी- 1 मीटर

पंक्ति से पंक्ति की दूरी- 2 मीटर।

प्रजाति- इलाहाबाद सफेदा, अर्का मृदुला व पौध को प्रमाणित नर्सरी से खरीद करना चाहिए।

पौध रोपण:- पौध रोपण को जुलाई माह में 3 बरसात के बाद करना चाहिए व सिंचाई साधन उपलब्ध हो तो जनवरी फरवरी में भी पौध रोपण किया जा सकता है। पौध रोपण करते समय कलम कटी हुई जगह को जमीन से ऊपर रखना चाहिए।

पलवार करना- पौध की जड़ों में नमी बनाए रखने के लिए पौधे के थावले पर घास डाल देनी चाहिए।

पौध की कटाई छंटाई- पौध की वृद्धि एवं विकास सही से हो के लिए व उच्च घनत्व को बनाये रखने व उत्पादन को बढाने के लिए कटाई छंटाई जरूरी है क्योंकि अमरूद का फल नई शाखाओं पर लगते हैं।

कटाई छंटाई वर्ष में तीन बार फ़रवरी, मई व अक्टूबर में करनी चाहिए।
पहली छंटाई पौध लगाने के तीन से चार माह अक्टूबर-नवम्बर में करनी चाहिए। कटाई छंटाई करते समय पौधे के ऊपरी हिस्से को ओर अनावश्यक टहनियों को हटा देना चाहिए।
सातवें वर्ष में पौध के दूसरे स्तर के डाल या टहनी को काट देना चाहिए कटाई करते समय ध्यान रखना चाहिए कि भूरे व हरे भाग जहां मिल रहे हो वहां काटना चाहिये।
पौध की सिचाई- पौध की सिचाई ठंड में एक बार व गर्मियों में दो बार थावले बनाकर करनी चाहिए।

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